‘भारतीय भू-सर्वेक्षण’ (GSI) ने ‘ब्रिटिश भू-सर्वेक्षण’ के सहयोग से ‘लैंडस्लिप परियोजना’ के अंतर्गत भारत के लिये ‘क्षेत्रीय भूस्खलन पूर्व-चेतावनी प्रणाली’ का विकास किया है। वर्तमान में, दार्जिलिंग एवं नीलगिरी में भारतीय भू-सर्वेक्षण इसका पायलट परीक्षण कर रहा है।
भारतीय भू-सर्वेक्षण, लैंडस्लिप परियोजना के ज़रिये वर्ष 2017 के बाद की वर्षा की स्थिति के आधार पर ‘प्रायोगिक भूस्खलन पूर्व-चेतावनी प्रणाली’ का विकास कर रहा है।
भारतीय भू-सर्वेक्षण ने इस वर्ष से उत्तराखंड, केरल, सिक्किम आदि में ‘क्षेत्रीय भूस्खलन पूर्व-चेतावनी प्रणाली’ के विकास के लिये अनुसंधान व अन्य ज़मीनी कार्य शुरू कर चुका है।